भा. कृ. अनु. प.-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान,शिमला 

हमारे विवरण

यह संस्थान शिमला  शहर के मध्‍य (हृदय) में, बैमलोई के निकट, शिमला पुराना बस स्टैंड से लगभग 4 कि.मी. तथा शिमला रेलवे स्टेशन से लगभग 6 कि.मी. की दूरी पर, राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर एवं समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहां की जलवायु शीतोष्ण के साथ नमीयुक्त है। यहां पर वार्षिक नमी लगभग 1500 एम.एम. होती है जिसमें 1252 एम.एम. वर्षा के रूप में प्राप्त होती तथा शेष बर्फबारी के रूप में प्राप्त होती है। शरद् ऋतु के मौसम में यहां का न्यूनतम एवं अधिकतम तापक्रम -2 डिग्री सेंटीग्रेड से लेकर 15 डिग्री सेंटीग्रेड तक रहता है जबकि ग्रीष्म ऋतु के मौसम में क्रमशः यह 18 डिग्री सेंटीग्रेड से लेकर 28 डिग्री सेंटीग्रेड तक रहता है। इस संस्‍थान का कुफरी स्‍टेशन शिमला-रामपुर राजमार्ग पर बैमलोई से 17 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। प्रारम्भ में, केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के केवल तीन अनुसंधान केन्द्र- शिमला, कुफरी एवं भुवाली थे। वर्तमान में, देश के आलू उत्पादन क्षेत्रों में इसके 7 क्षेत्रीय केन्द्र हैं। ये सभी देश के विविध आलू उत्पादन क्षेत्रों जैसे- कुफरी-फागू-हिमाचल प्रदेश, मोदीपुरम- उत्तर प्रदेश, जालंधर-पंजाब, ग्वालियर-मध्य प्रदेश, पटना-बिहार, शिलांग-मेघालय एवं ऊटी-तमिलनाडू में स्थित हैं।

केन्द्र

 

अक्षांश

(एन)

 

देशान्तर

(ई)

 

ऊँचाई

(एम.)

 

स्थापना वर्ष  क्षेत्रफल (हेक्‍टेयर)
शिमला

 

31 77 2202 1935 5.2
 कुफरी-फागू 32 77 2501 1963 32.0
 शिलांग 27 91 1500 1959 12.8
 ऊंटी 11 76 2245 1957 16.6
 जालंधर 31 75 237 1957 80.0
 मोदीपुरम 29 76 222 1971 153.8
 ग्वालियर 26 78 207 1979 179.5
 पटना 25 85 53 1949 40.9
 कुल 520.8

आलू की फसल के बारे में

आलू कार्बोहाईडेट-युक्त, लेकिन कम वसा वाली फसल है, जो लगभग 150 देशों में उगाई जाती है तथा विश्व के लगभग एक अरब लोगों द्वारा इसका उपभोग किया जाता है। यह अधिक उपज वाली, कम अवधि में तैयार होने वाली फसल है तथा इसके 80 प्रतिशत तक शुष्क पदार्थ को खाने योग्य पौष्टिक भोजन के रूप में उपभोग किया जा सकता है। शुष्क वजन के आधार पर, आलू में प्रोटीन की मात्रा अनाज के समान पायी गई तथा आलू में प्रोटीन की गुणवत्ता दूध के बराबर है। आलू विटामिन सी’का समृद्ध स्रोत है तथा लोह, विटामिन बी 1, बी 3, बी 6, फोलेट, पैनटोथैनिक एसिड, रिबोफ्लेविन जैसे- पोटिशियम, फॉसफोरस एवं मैग्नीशियम का मध्‍यम दर्जे का स्रोत है। इसका आहार ऐन्टीऑक्सीडेन्ट एवं फाइबर युक्त भी होता है, जो उम्र बढ़ने से संबंधित बीमारी को रोकने तथा स्वास्थ्य लाभ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उबले हुए आलू का ग्‍लाईसेमिक सूचकांक जो कि रक्त में शर्करा पर कार्बोहाईडेट के प्रभाव का एक उपाय सफेद चावल 58 तथा सफेद ब्रेड में 71 की तुलना में 56 (मध्यम) है। इसलिए यह एक गलत धारणा है कि आलू से मोटापा बढ़ता है तथा मधुमेह के रोगियों को इसे खाने की मनाही है। आलू में 120 टन प्रति हेक्‍टेयर उपज देने की क्षमता है। उच्च प्रोटीन-कैलोरी अनुपात एवं कम वानस्पतिक चक्र के कारण, दूसरी अन्य फसलों की तुलना में कम समय में आलू की उपज से काफी अधिक मात्रा में खाद्य ऊर्जा, प्रोटीन तथा प्रति इकाई क्षेत्र शुष्क पदार्थ प्राप्त होते हैं। भारत में, आलू को मिश्रित, अन्तः प्रसारित या अनुक्रमिक फसल के रूप में उगाया जा सकता है। यह खरीफ (पठारी), अगेती सह फसली शरद ऋतु, मुख्य रबी एवं बसंत, ग्रीष्म के मौसम में भारत के विभिन्न भागों में पूरे वर्ष भर उगाया जाता है। इसकी फसल को बुआई तिथि के 65 दिन के बाद खोदाई की जा सकती है या फसल पद्धति के आधार पर 100-110 दिन तक उगाया जा सकता है।