भा. कृ. अनु. प.-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान,शिमला 

संगठनात्मक ढ़ांचा

संगठनात्मक ढ़ांचा

संगठनात्मक ढ़ांचा

केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बागवानी विभाग के अर्न्तगत आता है। यह विभाग उप महानिदेशक (बागवानी) के नेतृत्व में कार्य करता है, जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक को सहयोग करता है। कुफरी में केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान की एक पुरानी इमारत स्थित है। इस संस्थान के निदेशक, अनुसंधान, शिक्षा, प्रसार एवं प्रशासन से संबंधित समग्र गतिविधियों के प्रमुख होते हैं। निदेशक, मुख्यालय के छः संभागों जैसे कि- फसल सुधार, फसल उत्पादन, पौध संरक्षण, बीज प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विज्ञान तथा केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान परिसर, मोदीपुरम सहित सात क्षेत्रीय केन्द्रों को नेतृत्व प्रदान करते हैं।

संस्थान द्वारा किये गये अनुसंधान कार्यों की उच्च स्तरीय पंचवर्षीय समीक्षा दल  (क्यू.आर.टी.) द्वारा प्रत्येक पांच वर्ष में समीक्षा की जाती है। इसके अलावा, अनुसंधान परियोजनाओं की वार्षिक प्रगति का विश्लेषण ”अनुसंधान सलाहकार समिति” तथा आन्तरिक रूप से ”संस्‍थान अनुसंधान समिति” द्वारा गहराई से शोध कार्य की समीक्षा की जाती है।

संस्थान में 13 सदस्यों वाली ”संस्थान प्रबन्ध समिति” भी गठित है जिसमें 4 सदस्य संस्थान के वैज्ञानिक, 3 सदस्य राज्य कृषि विश्वविद्यालय एवं राज्य कृषि/बागवानी विभाग के प्रतिनिधि, 2 सदस्य किसानों के प्रतिनिधि तथा एक सदस्य भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का प्रतिनिधित्‍व करता है। संस्थान की बोर्ड समिति एवं वित्तीय मामलों की समीक्षा करने हेतु संस्थान प्रबन्ध समिति की बैठक वर्ष में दो से तीन बार आयोजित की जाती है। इसके अलावा अन्य समितियां जैसे- संस्थान की ”संयुक्त कर्मचारी परिषद”, ”शिकायत प्रकोष्ठ”, ”स्नातकोत्तर समिति”, ”प्रकाशन समिति”, ”क्रय समिति”, ”पुस्तकालय समिति” एवं ”महिला प्रकोष्ठ” आदि भी संस्थान के कार्य को सहज और सरल बनाने में सहायता करती है।

संस्थान के संभाग:

·         फसल सुधार संभाग

·         पौध संरक्षण संभाग

·         फसल उत्पादन संभाग

·         बीज प्रौद्योगिकी संभाग

·         फसल दैहिकी, जीव रसायन एवं फसलोत्तर तकनीकी संभाग

·         सामाजिक विज्ञान संभाग